भगवान, गुरु और माता-पिता: जानिए किसका स्थान है सबसे ऊंचा

सनातन संस्कृति और हमारे प्राचीन शास्त्रों में संबंधों की गहराई और उनके महत्व को बहुत ही सुंदर ढंग से समझाया गया है। अक्सर हमारे मन में यह जिज्ञासा होती है कि भगवान से बड़ा कौन होता है और क्यों? आध्यात्मिक कथाओं और शास्त्रों की व्याख्या के अनुसार, इस सृष्टि में भगवान का स्थान सर्वोच्च है, लेकिन जब हम मानवीय जीवन और संस्कारों की बात करते हैं, तो कुछ रिश्तों को ईश्वर से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है।

शास्त्रों के अनुसार, भगवान से बड़ा गुरु को माना गया है। संत कबीरदास जी ने भी कहा है कि यदि गुरु और गोविंद (भगवान) दोनों एक साथ खड़े हों, तो सबसे पहले गुरु के चरण स्पर्श करने चाहिए, क्योंकि गुरु ही हमें ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के बाद जीवन में पिता का स्थान आता है, जो हमें इस संसार में जीना सिखाते हैं, हमारा संरक्षण करते हैं और हमें उंगली पकड़कर आगे बढ़ाते हैं।

लेकिन, इस संपूर्ण सृष्टि में पिता से भी ऊंचा और सबसे सर्वोच्च स्थान मां का माना गया है। मां का स्थान ईश्वर, गुरु और पिता तीनों से बड़ा है। इसका कारण यह है कि मां न केवल हमें नौ महीने अपनी कोख में रखकर इस दुनिया में लाती है, बल्कि वह हमारी पहली गुरु भी होती है। मां का निस्वार्थ प्रेम, त्याग और ममता साक्षात ईश्वर का ही रूप हैं। इसलिए कहा जाता है कि माता-पिता और गुरु की सेवा करने वाले को ईश्वर स्वतः ही मिल जाते हैं।

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