भारत आने वाले पहले अंग्रेज और इतिहास की मोड़

भारत का इतिहास कई विदेशी यात्रियों और व्यापारियों की कहानियों से भरा पड़ा है। जब भी भारत में यूरोपीय लोगों के आगमन की बात होती है, तो सबसे पहले वास्को डी गामा का नाम दिमाग में आता है। साल 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा समुद्री रास्ते से भारत के मालाबार तट पर पहुंचे थे। उन्होंने यूरोप और भारत के बीच एक नए समुद्री व्यापार मार्ग की शुरुआत की थी।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत आने वाला पहला अंग्रेज कौन था? पुर्तगालियों के आने के लगभग एक सदी बाद, यानी 1599 में जॉन मिल्डेनहॉल भारत आने वाले पहले ब्रिटिश नागरिक बने। खास बात यह है कि वे वास्को डी गामा की तरह समुद्र के रास्ते नहीं, बल्कि जमीन के रास्ते (थल मार्ग) से भारत पहुंचे थे।

जॉन मिल्डेनहॉल एक व्यापारी थे, जिन्होंने भारत आकर खुद को ईस्ट इंडिया कंपनी के राजदूत के रूप में पेश किया। उस समय भारत में मुगल सम्राट अकबर का शासन था। मिल्डेनहॉल का मुख्य उद्देश्य मुगल दरबार में व्यापारिक छूट और अधिकार प्राप्त करना था। हालांकि उनकी इस यात्रा के समय ईस्ट इंडिया कंपनी को औपचारिक रूप से शाही फरमान नहीं मिला था, फिर भी उनकी यह यात्रा भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के शुरुआती कदमों की एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।

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