फरवरी में 28 या 29 दिन क्यों होते हैं?

फरवरी महीने में 28 दिन होना कोई अंधविश्वास या मनमानी नहीं, बल्कि यह प्रकृति के साथ समय के संतुलन का हिस्सा है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करने में लगभग 365 दिन और लगभग 6 घंटे का समय लेती है। यानी हर साल 6 घंटे का अतिरिक्त समय बच जाता है।

यह अतिरिक्त समय जमा होते-होते चार साल बाद एक पूरे दिन में बदल जाता है। इसीलिए हर चार साल बाद एक लीप ईयर आता है, जब फरवरी के महीने में 29 दिन होते हैं। इस तरह कैलेंडर और वास्तविक सौर वर्ष के बीच संतुलन बना रहता है।

फरवरी को छोटा महीना बनाए जाने के ऐतिहासिक कारण भी हैं। प्राचीन रोमन कैलेंडर में साल की शुरुआत मार्च से होती थी, और फरवरी साल का अंतिम महीना था। जब ग्रेगोरियन कैलेंडर को अपनाया गया, तब भी फरवरी को 28 दिन दिए गए, सिर्फ इसलिए कि साल को 365 दिनों में फिट करना जरूरी था।

आज भी फरवरी के 28 या 29 दिन होने का कारण वैज्ञानिक और तार्किक है। यह न सिर्फ प्रकृति के

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय