भारत में चाय का इतिहास

भारत में चाय का सफर बहुत दिलचस्प और पुराना है। हालांकि आज भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादकों और प्रेमियों में से एक है, लेकिन पारंपरिक रूप से चाय यहां की मूल फसल नहीं है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, भारत में बड़े पैमाने पर चाय की शुरुआत ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान 19वीं सदी में हुई थी।

अंग्रेजों ने चीन से चाय की पत्तियां मंगवाकर असम की पहाड़ियों और दार्जिलिंग की उपजाऊ घाटियों में इसका व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया। 1823 में असम के जंगलों में रॉबर्ट ब्रूस नामक अंग्रेज को स्थानीय सिंगफू जनजाति द्वारा जंगली चाय के पौधे दिखाए गए थे। इसके बाद, ब्रिटिश सरकार ने यहां चाय के बागान लगाने शुरू किए और देखते ही देखते चाय भारत के जन-जीवन का अहम हिस्सा बन गई।

इससे पहले भी, प्राचीन काल में कुछ आदिवासी समुदाय औषधीय रूप में जंगली चाय की पत्तियों का इस्तेमाल करते थे, लेकिन इसे लोकप्रिय पेय के रूप में पहचान ब्रिटिश काल में ही मिली। आज सुबह की एक प्याली 'चाय' या 'चाय' हर भारतीय के दिन की शुरुआत का पर्याय बन चुकी है, जो उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक पूरे देश को आपस में जोड़ती है।

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