भारतीय संस्कृति में स्त्रियों के प्रकार: एक दृष्टि
भारत में स्त्री की छवि कई रूपों में देखी जाती है। प्राचीन ग्रंथों और साहित्य में स्त्रियों को न केवल घर की सुंदरता, बल्कि जीवन की शक्ति के रूप में भी देखा गया है। कुछ पारंपरिक विचार औरतों को 13 प्रकारों में बांटते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं – सधवा, विधवा, चित्रिणी, पद्मिनी, हस्तिनी, शंखिनी, पुंश्चली और आतुरा।
सधवा स्त्री वह होती है जिसका पति जीवित होता है। इसे समाज में सम्मान मिलता है। विधवा को कई बार परंपरा में अलग दृष्टि से देखा गया, लेकिन आज यह दृष्टिकोण बदल रहा है। पद्मिनी को आदर्श नारी माना जाता है – सुंदर, सद्गुणी और पतिव्रता।
कुछ वर्गीकरणों में चित्रिणी (कला में रुचि रखने वाली), हस्तिनी (जो दृढ़ चरित्र की हो), शंखिनी (जो घर की सुख-शांति की प्रतीक हो), पुंश्चली (स्वतंत्र चिंतन वाली) और आतुरा (भावुक व संवेदनशील) जैसे वर्ग भी बताए गए हैं।
यह वर
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