भारत आने वाली पहली विदेशी कंपनी
आज भारत में दुनिया भर की बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां काम कर रही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की धरती पर कदम रखने वाली पहली विदेशी व्यापारिक कंपनी कौन सी थी? इसका जवाब है ईस्ट इंडिया कंपनी। ब्रिटेन की इस कंपनी ने भारत के इतिहास और अर्थव्यवस्था को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया था।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि अगस्त 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिंस अपने मशहूर जहाज 'हेक्टर' के साथ भारत पहुंचे थे। उन्होंने गुजरात के सूरत बंदरगाह पर अपने जहाज का लंगर डाला और इसी के साथ भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी का औपचारिक आगमन हुआ। हालांकि, अंग्रेजों के लिए यह राह इतनी आसान नहीं थी, क्योंकि उस समय हिंद महासागर और भारतीय व्यापारिक मार्गों पर डच और पुर्तगाली व्यापारियों का पहले से ही वर्चस्व था।
सूरत में उतरने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे मुगल बादशाह जहांगीर से व्यापार करने की इजाजत हासिल की। शुरुआत में केवल मसालों, रेशम और नीले कपड़े (नील) का कारोबार करने आई इस कंपनी ने धीरे-धीरे अपनी व्यावसायिक जड़ों को मजबूत किया। आगे चलकर इसी व्यापारिक कंपनी ने भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर कब्जा कर लिया और देश को दो सदियों तक गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखा। सूरत का वह छोटा सा बंदरगाह भारत के एक नए और संघर्षपूर्ण दौर का साक्षी बना।
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