भारत में सरसों और खाद्य तेलों की बढ़ती मांग
भारत में खाद्य तेलों का उपयोग हमारी रसोई और खान-पान की परंपराओं का एक अहम हिस्सा रहा है। चाहे दैनिक भोजन तैयार करना हो या पारंपरिक व्यंजन, सही तेल का चुनाव हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के अनुसार, देश में हर साल औसतन 230 लाख टन खाद्य तेल की खपत होती है। इस कुल खपत में सरसों का तेल अपनी खास सुगंध और स्वाद के कारण उत्तर और मध्य भारत के घरों में सबसे अधिक पसंद किया जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार में लोगों की पसंद और खाने-पीने की आदतों में काफी बदलाव देखने को मिला है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते लोग अब पारंपरिक तेलों के साथ-साथ नए विकल्पों को भी अपना रहे हैं। इसी क्रम में राइस ब्रान ऑयल ने एडिबल कैटेगरी में आने के बाद बहुत तेजी से अपनी पहचान बनाई है। डॉ. बीवी मेहता के अनुसार, वर्तमान में देश में प्रतिवर्ष लगभग 10 से 11 लाख टन राइस ब्रान ऑयल का उपयोग हो रहा है।
खाद्य तेल उद्योग में आया यह बदलाव यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ता अब स्वाद के साथ-साथ सेहत पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं। सरसों के तेल की मजबूत स्थिति के साथ-साथ राइस ब्रान जैसे नए विकल्पों की बढ़ती मांग भारत के खाद्य बाजार को अधिक विविध और संतुलित बना रही है।
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