भारतीय संगीत के जनक और इसकी अलौकिक उत्पत्ति

संगीत केवल ध्वनियों का समूह नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के हर कण में बसा हुआ एक अद्भुत अहसास है। बहती नदियों की कल-कल, हवा की सरसराहट और पक्षियों की चहचहाहट में संगीत का वास है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय संगीत के जनक कौन हैं?

पौराणिक मान्यताओं और शिवमहापुराण के अनुसार, भगवान शिव को संगीत का पहला जनक माना जाता है। सृष्टि की रचना के समय, जब दुनिया में ध्वनियों का कोई सुव्यवस्थित रूप नहीं था, तब भगवान शिव के डमरू की ध्वनि से ही संगीत के मूल स्वरों का जन्म हुआ। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव से पहले संगीत और कला के बारे में इस संसार में किसी को भी कोई जानकारी नहीं थी।

भगवान शिव को 'नटराज' के रूप में भी पूजा जाता है, जो नृत्य और संगीत के सर्वोच्च देवता हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले तांडव नृत्य से ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संचार होता है और संगीत के राग-रागिनियों का उदय हुआ। इसके बाद यह दिव्य कला देवी सरस्वती, नारद मुनि और अन्य ऋषियों के माध्यम से धरती पर मानव समाज तक पहुँची।

सामवेद को भी भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार ग्रंथ माना जाता है, जिसमें शिव द्वारा उत्पन्न ध्वनियों को वैदिक ऋचाओं में पिरोया गया। आज जिस भारतीय शास्त्रीय संगीत पर पूरे विश्व को गर्व है, उसकी आत्मा और जड़ें भगवान शिव की भक्ति और प्रकृति की ध्वनियों में ही निहित हैं।

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