मानुष की आँखों का रंग कैसे तय होता है?

क्या आपने कभी सोचा है कि किसी की आँखें नीली, किसी की भूरी और किसी की बिल्कुल काली क्यों होती हैं? इसके पीछे हमारे शरीर की एक बेहद दिलचस्प प्रक्रिया है। आँखों के रंग का पूरा दारोमदार उसके एक खास हिस्से पर होता है, जिसे आइरिस यानी परितारिका कहा जाता है। यह वही रंगीन हिस्सा है जो पुतली के चारों ओर दिखाई देता है।

इस आइरिस के भीतर एक विशेष प्रकार का पिगमेंट यानी रंजक पदार्थ होता है, जिसे मेलानिन कहते हैं। हमारे शरीर में मेलानिन की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, आँखों का रंग उतना ही गहरा (जैसे भूरा या काला) होगा। इसके विपरीत, यदि मेलानिन की मात्रा कम होती है, तो आँखें हल्की यानी नीली या हरी नजर आती हैं। यह सब पूरी तरह से हमारे माता-पिता से मिलने वाले जेनेटिक्स या आनुवंशिक गुणों पर निर्भर करता है।

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