महिलाओं के शरीर को लेकर समाज की गलत धारणाएं
कई बार हम सुनते हैं कि महिलाओं के पेशाब करने वाले अंग को "इज्जत" कहा जाता है। यह बात दर्द भरी है क्योंकि यह नहीं बताती कि शरीर क्या है, बल्कि यह दिखाती है कि हमारे समाज ने महिलाओं के शरीर के प्रति कैसी गलत और विकृत सोच विकसित कर ली है।
असल में, महिलाओं के जननांग को "इज्जत" कहने की आदत इसलिए पनपी क्योंकि पुरुष प्रधान समाज ने महिलाओं के शरीर को लेकर एक गलत नैतिकता बना दी है। जैसे ही किसी लड़की के साथ बलात्कार होता है, लोग उसे "बेइज्जत" कहने लगते हैं। यहाँ तक कि पीड़िता के अपने परिवार वाले भी उसे घृणा की नजरों से देखने लगते हैं। ऐसे में "इज्जत" का मतलब सिर्फ और सिर्फ एक अंग नहीं रह जाता, बल्कि पूरी लड़की का अस्तित्व हो जाता है।
इसकी जड़ में पुरुषों की अपनी कामवासना छिपी है। हमने लड़कियों के शरीर को इतना यौनिकृत कर दिया है कि उनके निजी अंगों को लेकर भी झूठी शर्म और डर पैदा हो गया है। इसलिए
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