मूर्खता के दो पहलू: समझ और अज्ञान का फर्क
दुनिया में इंसानों के स्वभाव और उनकी बुद्धि को लेकर कई तरह की बातें कही गई हैं। आमतौर पर हम सभी को एक ही तराजू में तौल देते हैं, लेकिन गहराई से देखा जाए तो मूर्ख व्यक्ति मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। इन दोनों श्रेणियों में जमीन-आसमान का अंतर होता है और इन्हें समझने का नजरिया भी अलग होना चाहिए।
पहले प्रकार में वे लोग आते हैं जो किसी दिमागी बीमारी, जन्मजात कमजोरी या मानसिक अक्षमता के कारण चीजों को सामान्य रूप से नहीं समझ पाते। ऐसे लोग वास्तव में 'बेचारे' और सहानुभूति के पात्र हैं। उनकी इस स्थिति में उनका कोई दोष नहीं होता। समाज और परिवार का कर्तव्य है कि वे उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाएं और उन्हें सहारा दें, क्योंकि उनकी मूर्खता उनकी मजबूरी है, कोई जानबूझकर किया गया व्यवहार नहीं।
दूसरे और सबसे खतरनाक प्रकार में वे लोग आते हैं जिन्हें हम पढ़े-लिखे मूर्ख कहते हैं। ये वे लोग हैं जिनके पास डिग्रियां तो हैं, लेकिन वे व्यावहारिक ज्ञान, समझदारी और संवेदनशीलता से कोसों दूर हैं। ऐसे लोग अहंकार, अंधविश्वास या बिना सोचे-समझे दूसरों की नकल करने में अपनी बुद्धि खो देते हैं। वे सही और गलत का अंतर जानने के बावजूद अपनी जिद या स्वार्थ के कारण मूर्खतापूर्ण व्यवहार करते हैं।
सच्ची शिक्षा वही है जो इंसान को विवेकशील और संवेदनशील बनाए। डिग्री होने का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति बुद्धिमान भी हो। इसलिए, पहली श्रेणी के लोगों की मदद करनी चाहिए और दूसरी श्रेणी के लोगों से दूरी बनाए रखना ही समझदारी है।
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