मोक्ष: जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य
मोक्ष हिंदू दर्शन के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा और अंतिम उद्देश्य है। यह वह अवस्था है, जब मनुष्य जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परमात्मा में विलीन हो जाता है। इसे साक्षात् परब्रह्म प्राप्ति कहा जा सकता है।
हालांकि, मोक्ष की प्राप्ति अचानक नहीं होती। इसके लिए जीवन के तीन पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ और काम—का संतुलित अनुसरण आवश्यक है। धर्म वह मार्गदर्शन है जो हमें बताता है कि अर्थ (संपत्ति, स्थिति) और काम (भौतिक इच्छाएँ) को कैसे साधन मात्र मानकर सही ढंग से प्राप्त किया जाए।
अर्थ और काम को धर्म के दायरे में रखकर ही सफलता मिलती है। जब ये तीनों सुसंतुलित होते हैं, तब मनुष्य का मन शांत होता है और वह आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ पाता है। धीरे-धीरे वह भौतिक बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष के निकट पहुँचता है।
इस प्रकार, मोक्ष कोई तांत्रिक या रहस्यमय अवस्था नहीं, बल्कि जीवन के सही आचरण, नैतिकता और आत्मबोध का परिणाम है।
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