रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और उनकी शहादत

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम वीरता और साहस का प्रतीक है। सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने अंतिम सांस तक अंग्रेजों से लोहा लिया।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि लक्ष्मीबाई की मृत्यु कैसे हुई? ऐतिहासिक दस्तावेजों और तथ्यों के अनुसार, ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में अंग्रेजों के साथ लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। युद्ध के मैदान में वह चारों तरफ से ब्रिटिश सैनिकों से घिर चुकी थीं। इसी संघर्ष के दौरान एक अंग्रेज सैनिक ने उनके सिर पर तलवार से जोरदार वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और यही चोट उनकी शहादत का कारण बनी।

रानी लक्ष्मीबाई ने जीते जी अंग्रेजों के हाथ न आने का संकल्प लिया था। इसलिए, गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनके वफादार सैनिक उन्हें पास के एक बाबा गंगादास की कुटिया में ले गए, जहां उन्होंने प्राण त्यागे और वहीं उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। रानी लक्ष्मीबाई का यह सर्वोच्च बलिदान आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की लौ जलाए रखता है।

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