लखनऊ के अंतिम राजा: नवाब वाजिद अली शाह
भारत के इतिहास में अवध और उसकी राजधानी लखनऊ का एक विशेष स्थान रहा है। कला, संस्कृति और तहज़ीब के इस शहर के अंतिम शासक नवाब वाजिद अली शाह थे। उन्होंने 13 फरवरी 1847 को अवध के 11वें राजा के रूप में सिंहासन संभाला और लगभग 9 वर्षों तक, यानी 11 फरवरी 1856 तक शासन किया। उनसे पहले उनके पिता अमजद अली शाह अवध के शासक थे।
नवाब वाजिद अली शाह को केवल एक शासक के रूप में ही नहीं, बल्कि कला, संगीत और नृत्य के एक महान संरक्षक के रूप में याद किया जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान लखनऊ में संगीत और कथक नृत्य की विधाओं को बहुत बढ़ावा मिला। वे खुद भी एक कुशल कवि और संगीतकार थे। हालांकि, 1856 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 'कुशासन' का आरोप लगाकर उनके साम्राज्य को अपने नियंत्रण में ले लिया और उन्हें कोलकाता (तब कलकत्ता) निर्वासित कर दिया गया।
उनकी अनुपस्थिति में, 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनके युवा पुत्र बिरजिस कद्र को नया नवाब घोषित किया गया था, जिन्होंने अपनी मां बेगम हज़रत महल के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। नवाब वाजिद अली शाह का निधन 1 सितंबर 1887 को हुआ, जिसके साथ ही अवध के एक सुनहरे और सांस्कृतिक युग का अंत हो गया।
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