एक सुंदर यात्रा की यादें
उस गर्मियों की छुट्टियों में हम सबने मिलकर एक अनोखा सफर तय किया था। मैं, यानी लेखक, और मेरे चार मित्र – अर्जुन, राहुल, सुमित और प्रिया – पहाड़ों की ओर निकल पड़े थे। कोई भी यात्रा अकेले नहीं, दोस्तों के संग ही सचमुच खूबसूरत हो जाती है।
हम सब एक छोटी-सी बस में बैठे थे, खिड़की से बाहर घने जंगल और झरने तेज़ी से बीत रहे थे। कोई गाना गा रहा था, कोई मज़ाक सुना रहा था और कोई नींद में डूब चुका था। उस सफर में हर पल किसी न किसी के साथ बाँटा गया।
हमने एक छोटे से गाँव में रुकावट की, जहाँ एक साधारण सी चाय की दुकान पर बैठकर हमने घंटों बातें कीं। कितना अलग था वो माहौल – धीमी गति, ताज़ी हवा, और दोस्तों की आवाज़ में गूंजती हँसी। अर्जुन के मजाक पर सबकी ठहाकें लग गई थीं, और प्रिया ने अपनी डायरी में उस पल को कैद कर लिया।
यात्रा के अंत में जब हम वापस लौटे, तो सिर्फ यादें ही नहीं, बल्कि एक मजबूत रिश्ता भी लौटे – वो रिश्ता ज
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