लेखक की कमजोरी और मित्रों का व्यवहार
हर इंसान में कुछ न कुछ कमजोरी होती है, लेखक भी इससे अछूता नहीं। लेखक की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि थोड़ी-सी मुश्किल आते ही वह घबरा जाता है। छोटी सी बात हो या आशंका का साया, उसका मन तुरंत व्यथित हो जाता है। यह भावुकता उसकी संवेदनशीलता को दर्शाती है, लेकिन कई बार यही उसकी कमजोरी बन जाती है।
इसी भावनात्मक दुनिया में, लेखक ने मित्रों के व्यवहार पर भी गहरी नज़र डाली है। वह पाता है कि कई बार मित्र भी दो मुँहे हो जाते हैं। एक तरफ वे मुस्कुरा-मुस्कुराकर प्यार बाँटते हैं, दूसरी तरफ पीठ पीछे कटुता या ईर्ष्या छिपी होती है। ऐसे मित्र संकट के समय साथ नहीं देते, बल्कि दूर भागते हैं या फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।
यह सच्चाई लेखक को चोट पहुँचाती है। वह तो दिल से लिखता है, भावनाओं को शब्द देता है, लेकिन कई बार उसकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ होता है। फिर भी, वह लिखता रहता है, क्योंकि लिखना उसकी ताकत भ
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।