दुर्गा विदाई: भावनाओं का सागर

विदाई का पल हर घर में खुशियों के साथ-साथ एक गहरा दर्द भी लेकर आता है। जैसे कोई बेटी अपने ससुराल जाती है, तो माँ की आँखों में आँसू छलक आते हैं, ठीक उसी तरह दुर्गा जी की विदाई पर भी भक्तों के मन में यही उदासी छा जाती है। 4 अक्टूबर 2022 को हुई दुर्गा विदाई में भी ऐसा ही नज़ारा था—हज़ारों लोग भक्ति और विरह की भावना में डूबे हुए थे।

माँ दुर्गा को विदाई देते समय उनके साथ श्रृंगार की सामग्री, सुंदर वस्त्र, मिठाई, चावल, जीरा, धन और खोइंछा (मखाने) जैसी चीज़ें भी रखी जाती हैं। ये सब उनके साथ जाने के लिए उपहार के रूप में दिए जाते हैं। यह परंपरा इस बात को दर्शाती है कि माँ को वो सब कुछ दिया जाए जिसकी उन्हें अपने घर लौटते समय आवश्यकता हो।

विदाई का दिन शुभ होना बहुत ज़रूरी माना जाता है। इसलिए इस दिन के शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर ही महापूजा की अंतिम रस्में पूरी की जाती हैं। भक्त माँ से विदा लेते स

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