शिव और कृष्ण: भिन्न रूप, एक ही सत्य
शिव और कृष्ण दोनों ही हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय देवता हैं, लेकिन उनकी प्रकृति और भूमिका में कुछ अंतर है। भगवान कृष्ण द्वापर युग के महानायक थे, जिन्होंने महाभारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया। वे एक चरित्र के रूप में जन्म लेने वाले दिव्य आत्मा थे, जिन्होंने धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए पृथ्वी पर प्रकट होकर अपना काम किया।
दूसरी ओर, भगवान शिव, महादेव के नाम से जाने जाते हैं, जिन्हें अनादि और अनंत माना जाता है। न उनका कोई आरंभ है और न अंत। वे सृष्टि के उग्र स्वरूप हैं, जो संहार के देवता हैं, लेकिन उस संहार के माध्यम से नई रचना का मार्ग खोलते हैं। शिव को अंधकार, अज्ञान और अहंकार के संहारक के रूप में देखा जाता है।
लेकिन रहस्य यह है कि शिव और कृष्ण दोनों ही एक ही चेतना के अलग-अलग पहलू हैं। कृष्ण जहां ज्ञान और कर्म के मार्गदर्शक हैं, वहीं शिव निर्व
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