भारतीय संगीत में श्रुति का महत्व और उसके प्रकार
भारतीय शास्त्रीय संगीत का मूल आधार ध्वनि और उसके सूक्ष्म रूप हैं। संस्कृत भाषा में 'श्रु' धातु का अर्थ होता है 'सुनना'। इस प्रकार, संगीत शास्त्र के अनुसार वह सूक्ष्म से सूक्ष्म ध्वनि जिसे हमारे कान स्पष्ट रूप से सुन सकते हैं और अलग से पहचान सकते हैं, उसे श्रुति कहा जाता है।
प्राचीन संगीत आचार्यों के अनुसार एक सप्तक के भीतर कुल 22 श्रुतियाँ होती हैं। ये श्रुतियाँ भारतीय संगीत के सुरों की नींव हैं। इन्हीं 22 श्रुतियों के बीच के विशिष्ट अंतरालों से संगीत के मुख्य 7 शुद्ध स्वरों—सा, रे, ग, म, प, ध, और नी—की उत्पत्ति होती है।
प्रत्येक स्वर को उसकी सूक्ष्मता और भाव के आधार पर निश्चित श्रुति-स्थानों पर स्थापित किया गया है। संगीतकार और गायक इन्हीं श्रुतियों के सटीक प्रयोग से रागों में मधुरता और भाव उत्पन्न करते हैं। यही कारण है कि भारतीय संगीत में श्रुति का ज्ञान अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
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