सुबह की पूजा और क्षमा प्रार्थना
हमारे जीवन में सुबह का समय बहुत ही पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है। इस समय की गई पूजा-अर्चना से मन को शांति मिलती है और दिन भर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। अक्सर लोग सुबह उठकर स्नान आदि के बाद अपने इष्ट देव की आराधना करते हैं, दीया जलाते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं।
लेकिन कई बार हमें पूजा-पाठ की सही विधि या पूरे मंत्र याद नहीं होते। ऐसे में मन में यह डर रहता है कि कहीं पूजा में कोई भूल तो नहीं हो गई। शास्त्रों में इसके लिए क्षमा याचना मंत्र का विधान बताया गया है। यदि आप सुबह की पूजा के अंत में इस मंत्र का पाठ करते हैं, तो पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए ईश्वर से क्षमा मांग सकते हैं:
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
इस मंत्र का सरल और सुंदर अर्थ यह है कि "हे प्रभु, मैं आपको बुलाना नहीं जानता और न ही विदा करना जानता हूँ। मुझे पूजा करने का सही तरीका भी नहीं आता। हे परमेश्वर, मुझे क्षमा करें। मैं मंत्र, क्रिया और भक्ति तीनों से हीन हूँ, फिर भी मैंने जो भी भक्तिभाव से आपकी पूजा की है, उसे कृपया स्वीकार करें और पूर्ण बनाएं।"
सच्ची श्रद्धा और भक्ति ही ईश्वर तक पहुँचने का सबसे सरल मार्ग है। सुबह की प्रार्थना के समय इस मंत्र को बोलने से मन का संकोच दूर होता है और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
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