हरे कृष्ण और शाकाहारी जीवनशैली
हरे कृष्ण आंदोलन के अनुयायी आमतौर पर मांस नहीं खाते। इसके पीछे की मान्यता गहरी आध्यात्मिक है। हिंदू धर्म में यह विश्वास है कि सभी जीवों में आत्मा होती है, चाहे वह मनुष्य हो या जानवर। ऐसे में, जानवरों को मारकर खाना ईश्वर की उपेक्षा माना जाता है।
हरे कृष्ण भक्त श्री कृष्ण को स्वयं भगवान मानते हैं और मानते हैं कि सभी जीव उनकी संतान हैं। इसलिए किसी जानवर को खाना उनके लिए भगवान के प्रति अनादर होगा। वे केवल ऐसा भोजन स्वीकार करते हैं जो भगवान को अर्पित किया गया हो, जिसे 'प्रसाद' कहा जाता है।
यही कारण है कि हरे कृष्ण मंदिरों और समुदायों में सात्विक, शाकाहारी भोजन का विशेष ध्यान रखा जाता है। उनके लिए खाना सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और भगवान के प्रति भक्ति का एक तरीका है।
22 मई 2008 को NPR द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी इस बात को स्पष्ट किया गया था कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार
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