भारत में अमीरों का प्रतिशत: एक विस्तृत आर्थिक विश्लेषण (भाग-1)

भारत अपनी तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और विशाल बाजार के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में देश के आर्थिक परिदृश्य में अभूतपूर्व बदलाव आए हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि "भारत में वास्तव में कितने प्रतिशत अमीर लोग हैं?" जब हम 'अमीर' शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो इसे अलग-अलग श्रेणियों जैसे कि आम करोड़पति, हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs), और देश की कुल संपत्ति पर कब्जा जमाने वाले शीर्ष 1% या 10% लोगों के संदर्भ में देखना पड़ता है।

1. शीर्ष 10% और शीर्ष 1% आबादी के पास कितनी दौलत?

आर्थिक असमानता और धन के वितरण पर नजर रखने वाली विभिन्न वैश्विक व राष्ट्रीय रिपोर्ट्स (जैसे वर्ल्ड इनइक्विलिटी रिपोर्ट) के अनुसार, भारत की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा समाज के एक छोटे से वर्ग के पास केंद्रित है।

  • आंकड़ों के मुताबिक, देश की लगभग 65% से 77% तक की कुल संपत्ति पर केवल शीर्ष 10% लोगों का नियंत्रण है।

  • वहीं, यदि बात करें देश की सबसे अमीर 1% आबादी की, तो अकेले इस वर्ग के पास भारत की कुल संपत्ति का 40% से अधिक हिस्सा मौजूद है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करने के लिए काफी है कि देश की संपत्ति का बड़ा हिस्सा चुनिंदा हाथों में केंद्रित है।

2. मिलेनियर (करोड़पति) परिवारों की संख्या में उछाल

हालिया आर्थिक और वित्तीय शोध रिपोर्ट्स (जैसे हुरुन इंडिया वेल्थ रिपोर्ट) बताती हैं कि भारत में करोड़पति घरानों या मिलेनियर परिवारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

  • देश में ऐसे परिवारों की संख्या तेजी से बढ़कर लगभग 8.7 लाख से अधिक हो गई है, जिनके पास करोड़ों रुपये की शुद्ध संपत्ति (Net Worth) है।

  • पिछले कुछ वर्षों में देश के भीतर नए मिलेनियर जुड़ने की रफ्तार काफी तेज हुई है, जो यह दर्शाती है कि मध्यम वर्ग से निकलकर लोग वित्तीय रूप से समृद्ध श्रेणी में प्रवेश कर रहे हैं।

(यह लेख का पहला भाग है। अगले भाग में हम अल्ट्रा-रिच (अति-अमीर) श्रेणी, अरबपतियों के आंकड़ों और शहरी बनाम ग्रामीण अमीर आबादी के अंतर पर विस्तार से चर्चा करेंगे।)