फुटबॉल के पिता कौन हैं? आधुनिक सॉकर के जनक का इतिहास और कहानी
फुटबॉल आज के समय में दुनिया का सबसे लोकप्रिय और अधिक पसंद किया जाने वाला खेल बन चुका है। जिसे आज अरबों लोग 'द ब्यूटीफुल गेम' (The Beautiful Game) के नाम से जानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि इस महान और रोमांचक खेल को आज का यह स्वरूप देने वाला वह कौन सा शख्स था, जिसे "फुटबॉल का पिता" (Father of Football) कहा जाता है?
यदि आप इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें, तो पाएंगे कि फुटबॉल जैसे खेल के शुरुआती रूप सदियों पहले प्राचीन चीन (त्सूजू) या ग्रीस में खेले जाते थे।
एबेनेज़र कॉब मोर्ले कौन थे?
एबेनेज़र कॉब मोर्ले का जन्म 16 अगस्त 1831 को इंग्लैंड के यॉर्कशायर के हेडन शहर में हुआ था।
खेलों के प्रति उनके इसी जुनून के कारण उन्होंने साल 1862 में 'बार्न्स फुटबॉल क्लब' (Barnes Football Club) की स्थापना की, जो अंग्रेजी फुटबॉल इतिहास के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण क्लबों में से एक था।
द फुटबॉल एसोसिएशन (FA) का गठन और नियमों की रूपरेखा
इस अराजकता को दूर करने के लिए मोर्ले ने एक दूरदर्शी कदम उठाया।
उनके इस प्रयास का बड़ा असर हुआ और 26 अक्टूबर 1863 को लंदन के ग्रेट क्वीन स्ट्रीट पर स्थित 'फ्रीमेसन्स टैवर्न' (Freemasons' Tavern) में विभिन्न क्लबों के प्रतिनिधियों की एक ऐतिहासिक बैठक हुई।
मोर्ले को इस संस्था का पहला मानद सचिव (First Secretary) चुना गया।
उन्होंने ही दुनिया के पहले आधिकारिक 13 नियम (Laws of the Game) अपने हाथों से लिखकर तैयार किए थे।
उनके बनाए गए इन नियमों ने फुटबॉल को रग्बी से पूरी तरह अलग कर दिया, जिसमें मैदान पर गेंद को हाथों से उठाने पर प्रतिबंध लगाया गया—जो आधुनिक सॉकर की सबसे बड़ी पहचान बनी।
आधुनिक फुटबॉल पर अमिट प्रभाव
एबेनेज़र कॉब मोर्ले द्वारा तैयार किए गए वे शुरुआती नियम आज भी आधुनिक फुटबॉल की नींव हैं।
क्या आप भारतीय फुटबॉल के इतिहास और उसके जनक के बारे में भी जानना चाहते हैं?
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