सीधे शब्दों में कहें तो भारतीय सेना में शराब का सेवन केवल शौक या 'मौज-मस्ती' के लिए नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कठोर भौगोलिक परिस्थितियां, ऐतिहासिक विरासत और मनोवैज्ञानिक दबाव जैसे ठोस कारण मौजूद हैं। आम नागरिक अक्सर इसे एक विलासिता के रूप में देखते हैं, लेकिन हकीकत में यह शून्य से नीचे के तापमान में जीवित रहने का एक औजार और युद्ध के मैदान में मानसिक संतुलन बनाए रखने का एक जरिया है। सेना में इसके वितरण की एक सख्त नियमावली होती है, जिसे 'राशन' कहा जाता है।

ऐतिहासिक विरासत और सैन्य संस्कृति की जड़ें

भारतीय सेना की वर्तमान संरचना और उसकी कई परंपराएं ब्रिटिश काल की देन हैं। अंग्रेजों के समय में 'रम' (Rum) को सैनिकों के दैनिक राशन का हिस्सा माना जाता था। उस दौर में लंबी समुद्री यात्राओं और दुर्गम जंगलों में तैनात सिपाहियों को बीमारियों से बचाने के लिए अल्कोहल को एक औषधि के रूप में देखा जाता था। आजादी के बाद भी, भारतीय सेना ने इस प्रथा को जारी रखा क्योंकि यह केवल पीने की आदत नहीं, बल्कि एक 'सोशल बॉन्डिंग' का माध्यम बन चुकी थी। मेस कल्चर में अधिकारियों और जवानों का एक साथ बैठना, हंसी-मजाक करना और थकान उतारना रेजिमेंटल भाईचारे को मजबूत करता है।

सैन्य जीवन अनुशासन और अलगाव का मिश्रण है। हफ्तों तक अपने परिवार से दूर, दुर्गम सीमाओं पर तैनात जवान अक्सर अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में, शाम के वक्त सीमित मात्रा में शराब का सेवन उन्हें एक अनौपचारिक वातावरण प्रदान करता है जहां वे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं। यह कोई अनियंत्रित गतिविधि नहीं है; हर यूनिट में एक सख्त कोटा सिस्टम लागू होता है, जिसे 'पग' के हिसाब से मापा जाता है। मर्यादा लांघने पर कोर्ट मार्शल जैसी कड़ी सजा का प्रावधान भी है, जो इसे नागरिक समाज की 'पार्टी संस्कृति' से पूरी तरह अलग बनाता है।

दुर्गम भूगोल और शारीरिक सहनशक्ति की चुनौती

सियाचिन जैसे ग्लेशियरों या तवांग की बर्फीली चोटियों पर, जहां तापमान -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, वहां मानव शरीर का जीवित रहना ही अपने आप में एक चमत्कार है। यहाँ शराब एक 'वासोडिलेटरी' (Vasodilatory) प्रभाव पैदा करती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, अल्कोहल रक्त वाहिकाओं को फैला देता है, जिससे त्वचा की सतह तक रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और शरीर को तात्कालिक गर्माहट का अनुभव होता है। हालांकि यह स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन शून्य से नीचे की स्थितियों में यह रक्त के जमने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक सिद्ध होता है।

इसके अलावा, ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में 'हाइपोथर्मिया' और 'फ्रॉस्टबाइट' का खतरा निरंतर बना रहता है। ऐसी कठिन परिस्थितियों में जवानों को नींद न आना और अत्यधिक तनाव होना आम बात है। रम का एक सीमित शॉट शरीर को शिथिल करने और सोने में मदद करता है, जो अगले दिन के कठिन ऑपरेशन के लिए ऊर्जा संचय करने हेतु अनिवार्य है। यहाँ यह समझना आवश्यक है कि यह 'नशा' करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को क्रियाशील रखने के लिए एक रणनीतिक ईंधन की तरह उपयोग किया जाता है। रेगिस्तानी इलाकों में, जहाँ रातें बेतहाशा ठंडी होती हैं, वहाँ भी यही तर्क लागू होता है।

मनोवैज्ञानिक सुदृढ़ता और युद्धकालीन मानसिकता

युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती से जीता जाता है। एक सैनिक को निरंतर मौत के साये में रहना पड़ता है। 'पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर' (PTSD) सेना में एक कड़वा सच है। निरंतर चौकसी और 'कॉम्बैट स्ट्रेस' के कारण मस्तिष्क हमेशा सतर्क रहता है, जिससे मानसिक थकान (Mental Fatigue) पैदा होती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नियंत्रित मात्रा में शराब का सेवन डोपामाइन के स्तर को थोड़ा बढ़ाकर तात्कालिक राहत प्रदान करता है, जिससे सैनिक अपनी चिंताओं से कुछ समय के लिए विमुख हो पाता है।

सामूहिक भोजन और शराब का सेवन एक ऐसी परंपरा है जो रैंक के पदानुक्रम को कुछ क्षणों के लिए धुंधला कर देती है। जब एक मेजर और एक सिपाही मेस में साथ बैठते हैं, तो वह संवाद की खाई को पाटने में मदद करता है। यह पारस्परिकता युद्ध के मैदान में एक-दूसरे के लिए जान देने की प्रेरणा बनती है। सेना की शब्दावली में इसे 'एस्प्रिट डी कॉर्प्स' (Esprit de Corps) कहा जाता है, जिसका अर्थ है अपनी यूनिट के प्रति गर्व और वफादारी की भावना। शराब यहाँ एक सामाजिक 'लुब्रिकेंट' का काम करती है जो कठोर सैन्य अनुशासन के बीच मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखती है।

आम गलतियाँ और विशेषज्ञ सुझाव

अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि सेना में शराब का सेवन केवल मनोरंजन के लिए होता है, लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है। सबसे बड़ी चूक तब होती है जब नागरिक इसे "अनियंत्रित पार्टी कल्चर" के रूप में देखते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सैन्य परिवेश में शराब का सेवन सख्त सैन्य अनुशासन और प्रोटोकॉल के अधीन होता है। यहां कुछ महत्वपूर्ण सुझाव और सुधार दिए गए हैं:

नियमित जांच: सेना में शराब की खपत पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि इसे कभी भी ड्यूटी के दौरान साहस बढ़ाने के साधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अनुशासनहीनता पाए जाने पर कड़े दंड का प्रावधान है।

स्वास्थ्य प्राथमिकता: एक आम गलती यह सोचना है कि शराब ठंड से लड़ने का स्थायी समाधान है। वैज्ञानिक रूप से, शराब शरीर का तापमान केवल अस्थायी रूप से बढ़ाती है। इसलिए, सैनिकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल निर्धारित मात्रा का ही सेवन करें और हाइड्रेशन पर ध्यान दें।

सामाजिक बंधन बनाम लत: इसे एक सामाजिक गतिविधि के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि तनाव से निपटने के एकमात्र तरीके के रूप में। विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिट में साथ बैठकर पीना सैनिकों के बीच भाईचारे (Camaraderie) को मजबूत करता है, जो युद्ध जैसी स्थितियों में मानसिक संबल प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या युद्ध के दौरान सैनिकों को शराब दी जाती है?

नहीं, युद्ध की स्थिति या सक्रिय ऑपरेशन के दौरान शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। शराब केवल पीस पोस्टिंग या बटालियन के विशेष आयोजनों और 'बड़ा खाना' जैसे कार्यक्रमों में ही सीमित मात्रा में उपलब्ध कराई जाती है। निर्णय हमेशा कमांडिंग ऑफिसर के विवेक पर निर्भर करता है।

2. क्या भारतीय सेना में सभी को शराब पीना अनिवार्य है?

बिल्कुल नहीं। यह पूरी तरह से व्यक्तिगत पसंद है। जो सैनिक शराब नहीं पीते, उन्हें इसके बदले में अन्य भत्ते या रिफ्रेशमेंट दिए जाते हैं। सेना में निजी पसंद का पूरा सम्मान किया जाता है और किसी पर भी सेवन के लिए दबाव नहीं डाला जाता।

3. सैन्य कैंटीन (CSD) में शराब सस्ती क्यों मिलती है?

सैनिकों को मिलने वाली शराब पर एक्साइज ड्यूटी और अन्य टैक्स में छूट दी जाती है। यह सरकार द्वारा उनकी कठिन सेवाओं और उनके बलिदान के प्रति एक सम्मान का प्रतीक है, ताकि वे और उनका परिवार कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण राशन और सुविधाएं प्राप्त कर सकें।

संपादकीय निर्णय (Editorial Verdict)

सेना में शराब के चलन को केवल नशे के नजरिए से देखना गलत होगा। यह सदियों पुरानी सैन्य परंपरा, दुर्गम क्षेत्रों की भौगोलिक आवश्यकता और मानसिक स्वास्थ्य के प्रबंधन का एक संतुलित मिश्रण है। मेरा मानना है कि जब तक यह मर्यादित मात्रा और सख्त अनुशासन के भीतर है, तब तक यह सैनिकों के मनोबल और उनके आपसी तालमेल को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंततः, यह उनके कठिन जीवन में थोड़े से विश्राम और सम्मान का एक माध्यम है जिसे सही परिप्रेक्ष्य में समझा जाना चाहिए।