कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी

भगवान श्रीकृष्ण के अनेक अद्भुत कार्यों में द्रौपदी की लाज बचाना सबसे प्रसिद्ध है। जब दुर्योधन और उसके भाइयों ने महाभारत के द्यूत सभा में द्रौपदी को अपमानित करने की कोशिश की, तब उनका वस्त्र उतारने का प्रयास किया गया। इसी समय द्रौपदी ने मन-ही-मन कृष्ण को याद किया और आह्वान किया।

श्रीकृष्ण, जो उस समय द्वारका में थे, उनकी पुकार सुनकर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से द्रौपदी के साड़ी को अखंड बना दिया। जितने भी वस्त्र उतारे जाते गए, उतने ही नए वस्त्र उसके ऊपर प्रकट होते गए। इस तरह कृष्ण ने न केवल द्रौपदी की लाज बचाई, बल्कि उस अन्याय के प्रति अपनी निष्ठा और न्याय की भावना को भी स्थापित किया।

मीरा जैसी संतों ने भी कृष्ण के इस कार्य को अपने भजनों में याद किया है। उनका मानना था कि जो भक्ति से युक्त हो, कृष्ण उसकी हमेशा रक्षा करते हैं। द्रौपदी के साथ यह घटना सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि व

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