2050 तक दुनिया में आबादी का नया संतुलन: एक नज़र

दुनिया भर में जनसांख्यिकी और आबादी का संतुलन तेज़ी से बदल रहा है। आने वाले तीन दशकों में वैश्विक धर्मों के ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, 2050 तक दुनिया भर में मुस्लिम आबादी बढ़कर लगभग 2.8 अरब होने का अनुमान है, जो कि वैश्विक जनसंख्या का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा होगा। वहीं दूसरी ओर, ईसाई धर्म के अनुयायियों की संख्या लगभग 2.9 अरब रहने की संभावना है, जो दुनिया की कुल आबादी का लगभग 31 प्रतिशत होगी।

इस तेज़ी से होती वृद्धि के पीछे सबसे मुख्य वजह इस्लाम मानने वालों के बीच पाई जाने वाली युवा आबादी (यंग पॉपुलेशन) है। वर्तमान आंकड़ों पर गौर करें तो इस्लाम में करीब 34 प्रतिशत आबादी 15 साल से कम उम्र के बच्चों की है। इसके मुकाबले, अगर दुनिया भर के औसत को देखें, तो वैश्विक स्तर पर 15 साल से कम उम्र के बच्चों का औसत सिर्फ 27 प्रतिशत है। उच्च प्रजनन दर और युवाओं का बड़ा अनुपात ही आने वाले समय में मुस्लिम धर्म को दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले धर्मों में शामिल कर रहा है।

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