भारत और चीन: प्रतिस्पर्धा से परे एक नया दृष्टिकोण

चीन के बढ़ते प्रभाव के सामने भारत के लिए सीधी प्रतिस्पर्धा करना आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण है। लेकिन प्रतिस्पर्धा एकमात्र रास्ता नहीं है। भारत के पास एक अलग ताकत है — अपने पड़ोस में विश्वास और विकास का मार्ग खोलने की क्षमता।

20 अगस्त, 2022 को ओआरएफ (वुड्रो विल्सन इंटरनेशनल सेंटर फॉर शमर्स) में एक विचार-गोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया था कि भारत चीन जितना खर्च नहीं कर सकता, लेकिन वह अपने निकटतम पड़ोसियों के लिए एक विश्वसनीय भागीदार बन सकता है। यह विश्वास खुले बाजारों, सहयोग और ज्ञान-साझाकरण के जरिए बन सकता है।

भारत अपनी तकनीकी विशेषज्ञता, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षमता के जरिए पड़ोसी देशों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उदाहरण के लिए, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और डिजिटल स्वास्थ्य पहलुओं में साझेदारी से न

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