डीएम की पावर कितनी होती है?
जिला अधिकारी, जिसे आमतौर पर डीएम (District Magistrate) कहा जाता है, जिले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी होता है। एक डीएम के हाथ में जिले की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी होती है। चाहे वो विकास कार्य हो, कानून व्यवस्था हो या फिर आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय – हर चीज़ का अंतिम नियंत्रण डीएम के हाथ में होता है।
डीएम किसी भी सरकारी विभाग का निरीक्षण कर सकता है। अगर जरूरत पड़े, तो वह किसी भी स्थान पर अचानक छापा भी मार सकता है। चाहे वो स्कूल हो, अस्पताल हो या कोई उद्योग – सभी पर उसकी नज़र रहती है। वह सरकारी जमीन, लाइसेंस, भूमि अधिग्रहण जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर भी फैसला लेता है।
सरकारी और गैर-औद्योगिक दोनों क्षेत्रों पर डीएम का नियंत्रण होता है। आपातकाल में, जैसे बाढ़, भूकंप या हिंसा की स्थिति में, वह जिले की सुरक्षा और राहत कार्यों का सीधा नेतृत्व करता है। इसके अलावा, चुनाव के दौरान भी डीएम की भूमिका अहम
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