माँ का प्यार: चुपचाप लेकिन गहरा

माँ का प्यार शब्दों से कहीं ज्यादा गहरा होता है। वे अक्सर कुछ नहीं कहतीं, लेकिन अपने बच्चों को अपने प्यार का एहसास दिला देती हैं। चाहे बच्चा छोटा हो या बड़ा, माँ की छोटी-छोटी आदतें उनके प्यार की भाषा बोलती हैं।

सुनना तो माँ की पहली आदत होती है। वह बच्चे की लाख बातें सुनती हैं, चाहे वह कितनी भी बेतुकी क्यों न हो। एक गले लगाना, एक माथे पर चुंबन, या सिर्फ उसके पसंदीदा खाने को याद रखना — ये छोटे काम भी उनके प्यार को दिखाते हैं।

बच्चे को जब किसी बात का एहसास होता है, तो माँ वहीं खड़ी हो जाती है। वह उसकी तकलीफ समझती है, उसके दर्द को अपना बना लेती है। सुरक्षा देना भी उनकी पहचान है — चाहे वह डर के समय हो या नाकामी के पल।

कई बार माँ बच्चे को गीत गुनगुनाती हैं, कहानी पढ़कर सुनाती हैं, या बस उसके पास बैठकर चुपचाप उसका हाथ थाम लेती हैं। ये सब छोटे-छोटे पल ही तो हैं जो बच्चे के दिल में जीवन भर छाए

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