भारत पर विदेशी कर्ज का बोझ और प्रति व्यक्ति देनदारी

हाल के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव आया है, लेकिन इसके साथ ही देश पर विदेशी कर्ज का आकार भी बढ़ा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 के अंत में भारत का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 620.7 अरब डॉलर हो गया था। यह एक साल पहले की तुलना में करीब 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। यदि इस कुल कर्ज की तुलना देश की लगभग 140 करोड़ की आबादी से की जाए, तो प्रत्येक नागरिक पर औसतन लगभग 35,000 रुपये से अधिक का विदेशी कर्ज आता है।

देश के इस कुल बाहरी कर्ज की संरचना को देखें तो इसका सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर में (53.2 प्रतिशत) है, जबकि भारतीय रुपये के रूप में देनदारी 31.2 प्रतिशत है। बाकी हिस्सा अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में विभाजित है। आमतौर पर सरकार और निजी कंपनियां यह कर्ज बुनियादी ढांचे के विस्तार, औद्योगिक विकास और व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए लेती हैं। हालांकि बढ़ता कर्ज एक वित्तीय चुनौती पेश करता है, लेकिन भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश को इस देनदारी को संभालने की ताकत देता है।

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