प्रेम अंधा क्यों होता है?
प्रेम अंधा होता है – ये कहावत सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सच्चाई है। जब कोई इंसान प्यार में पड़ता है, तो उसकी आँखों के सामने सिर्फ वही शख्स नजर आता है। बाकी दुनिया धुंधली पड़ जाती है। न वह उसके दोष देख पाता है, न आलोचना सुनने को तैयार होता है।
ये अंधापन सिर्फ दृष्टि का नहीं, मन का होता है। कई बार लोग बिना जाने-पहचाने, बस एक फोटो या कुछ मैसेज पर दिल दे बैठते हैं। आजकल तो इंटरनेट पर भी लोग "प्रेम अंधापन" का शिकार हो जाते हैं – बिना मिले, बिना जाने, सिर्फ भावनाओं के आगे झुक जाते हैं।
लेकिन क्या ये अंधापन बुरी बात है? शायद नहीं। क्योंकि प्यार में थोड़ा सा अंधापन तो जरूरी है। वरना हर छोटी बात पर दिमाग दौड़ाने लगे, तो रिश्ते बनते नहीं। वैसे भी, प्यार देखने से नहीं, महसूस करने से होता है।
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