गैर-जमानती अपराध में जमानत कब मिल सकती है?

भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के धारा 437(6) के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी गैर-जमानती अपराध के आरोप में गिरफ्तार है और उसकी अदालत में साक्ष्य लेने की पहली तारीख से 60 दिनों के भीतर मुकदमा पूरा नहीं होता है, तो उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। यह तब लागू होता है जब व्यक्ति पूरे 60 दिनों तक हिरासत में रहता है।

इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति अनुचित रूप से लंबे समय तक जेल में न रहे, खासकर जब अदालत द्वारा मामले की सुनवाई समय पर नहीं हो पाती हो। यह प्रावधान न्याय की गति को तेज करने और अभियुक्त के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए बनाया गया है।

हालांकि, यह अपवाद लागू नहीं होता यदि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा या आतंकवाद से जुड़ा हो, या अगर अदालत को लगे कि ऐसा करने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित होगी। फिर भी, यह प्रावधान एक महत्वपूर्ण राहत है उन लोगों के लिए जो न्यायिक देर

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