लीप वर्ष और फरवरी के दिन

आपने शायद कभी सोचा होगा कि क्यों कभी-कभी फरवरी 29 दिनों की हो जाती है? इसका जवाब छिपा है लीप वर्ष में। लीप वर्ष वह वर्ष होता है जिसमें 366 दिन होते हैं, बजाय 365 के। ऐसे वर्ष में फरवरी के महीने में 29 दिन होते हैं, जबकि सामान्य वर्ष में यह केवल 28 दिन की होती है।

लेकिन आखिर ऐसा क्यों होता है? दरअसल, पृथ्वी को सूरज के चारों ओर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 365 दिन और लगभग 6 घंटे का समय लगता है। यह अतिरिक्त समय चार साल में एक दिन बन जाता है। इसलिए हर चार साल बाद एक अतिरिक्त दिन मार्च से पहले यानी फरवरी में जोड़ दिया जाता है, ताकि हमारा कैलेंडर प्रकृति के समय के साथ संतुलन बनाए रखे।

इसीलिए आपको कुछ सालों में फरवरी के अंत में 29 तारीख दिखाई देती है। इस छोटे से बदलाव ने हमारे समय के हिसाब को अधिक सटीक बना दिय inflammable।

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