दिल्ली: एक शहर, दो दुनियाएं

दिल्ली भारत की राजधानी है, और अक्सर यहां के लग्जरी इलाकों — जैसे वसंत विहार, जोर बाग और ग्रीन पार्क — की वजह से लोग इसे एक समृद्ध शहर समझते हैं। लेकिन इस चमकदार पर्दे के पीछे एक बहुत अलग तस्वीर छिपी है।

शहर के उन्नत इलाकों के पास ही, हजारों लोग मुख्य रूप से अपनी ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गरीबी, बेघरता और बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी लाखों दिल्लीवासियों की रोजमर्रा की सच्चाई है। ये लोग अक्सर झुग्गियों में रहते हैं, जहां पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी होती है।

यह गरीबी सिर्फ आर्थिक नहीं है, बल्कि सामाजिक अलगाव का भी सवाल है। जहां एक तरफ अमीरों के लिए विलासिता आम बात है, वहीं दूसरी तरफ बहुत से लोग रोज भूखे सोते हैं। यह दिल्ली के भीतर की एक अजीब विषमता है — एक ही शहर में दो बिल्कुल अलग दुनियाएं साथ-साथ चल रही हैं।

दिल्ली के लोग गरीब हैं? यह सवाल सीधा है, लेकिन

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