दिल्ली: एक स्वर्ग जैसा नगर

ताज़ी हवा और हरा-भरा माहौल – कल्पना कीजिए, दिल्ली में सुबह उठते ही पेड़ों की हरियाली और फूलों की खुशबू से भरी हवा आपके चेहरे को छूती हो। अब यहाँ धूल भरी गुलेल वाली हवाएं नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में बसा नगर है।

यमुना नदी अब सचमुच पवित्र और साफ़ है। लोग इसमें नहाते हैं, पूजा करते हैं और घाटों पर सुबह-शाम बैठकर शांति से समय बिताते हैं। चोरी, डकैती या लूट-पाट का नामो-निशान मिट चुका है। शांति और भाईचारा इतना गहरा है कि अलग-अलग समुदाय एक दूसरे के घर में बिना बुलाए खाना खाते हैं।

सड़कें अब भीड़-भाड़ से मुक्त हैं। जनसँख्या घनत्व बेहद कम है, जिससे आवागमन आसान और तनावमुक्त है। बस, मेट्रो या साइकिल – सबके लिए सहज विकल्प हैं।

सर्दियों में धूप में आराम, गर्मियों में हल्की छांव, और बारिश में ताजगी – जलवायु इतनी सौम्य है कि मौसम बदलता है, पर परेशानी नहीं।

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