वह गांव जहां हनुमान जी की पूजा नहीं होती
उत्तराखंड के चमोली जिले में बसा द्रोणागिरी गांव एक अनोखी वजह से जाना जाता है। यहां के स्थानीय लोगों का एक प्राचीन मानना है कि रामायण काल में हनुमान जी जब संजीवनी बूटी लेकर लंका जा रहे थे, तो उसके लिए जिस पर्वत को वे उठाकर ले गए थे, वह वास्तव में द्रोणागिरी का पहाड़ था।
लोगों का मानना है कि तब से उस पहाड़ का एक हिस्सा अभी तक लापता है, और इसी कारण वे हनुमान जी के प्रति आज भी नाराज हैं। इस वजह से यहां कभी भी हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती। न तो हनुमान मंदिर है, न ही कोई उनकी मूर्ति स्थापित है।
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, और गांव वाले इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हैं। कई यात्री इस विशेष गांव को देखने जरूर आते हैं, ताकि इस अनोखे इतिहास के बारे में स्थानीय लोगों से सीधे जान सकें।
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