भारत में पहला ट्रैक्टर: एक क्रांतिकारी कदम
24 अप्रैल, 1959 का वह दिन भारतीय कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसी दिन फरीदाबाद स्थित आयशर (Eicher) के कारखाने से देश का पहला स्थानीय स्तर पर इकट्ठा किया गया ट्रैक्टर बाहर आया। यह केवल एक मशीन की शुरुआत नहीं थी, बल्कि किसानों के जीवन में आधुनिकीकरण और उत्पादकता के नए युग की शुरुआत थी।
आयशर ने न सिर्फ ट्रैक्टर को इकट्ठा किया, बल्कि 1965 से 1974 की अवधि में पूरी तरह से स्वदेशी ट्रैक्टर का निर्माण कर दिखाया। यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व की बात थी क्योंकि इस दौरान ट्रैक्टर के 100% घटक देश में ही तैयार किए जाने लगे। इससे न केवल तकनीकी निर्भरता कम हुई, बल्कि छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी ट्रैक्टर हासिल करना आसान हो गया।
आज जब हम खेतों में चलते ट्रैक्टर देखते हैं, तो उसकी जड़ें उसी 1959 के दिन से जुड़ी हैं, जब आयशर ने भारत की मिट्टी में आधुनिक कृषि का बीज बोया। यह एक साधारण मशीन नहीं,
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