फिल्मों में डबिंग क्यों की जाती है?
जब आप किसी फिल्म देख रहे होते हैं और लगता है कि कोई एक्टर बोल नहीं रहा, फिर भी आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही है — तो समझ जाइए, वहाँ डबिंग का काम हुआ है।
डबिंग की प्रक्रिया अक्सर फिल्म की शूटिंग के बाद होती है। कई बार सेट पर बैकग्राउंड नॉइज़, टेक्निकल खराबी या एक्टर की आवाज़ साफ़ न रिकॉर्ड होने की वजह से ऑडियो क्लियर नहीं होता। ऐसे में एक्टर को बाद में स्टूडियो में बुलाया जाता है और वह फिर से अपने डायलॉग बोलते हैं। इस प्रक्रिया को ऑटोमेटेड डायलॉग रिप्लेसमेंट (ADR) भी कहा जाता है।
कभी-कभी डबिंग नयी भाषा में भी की जाती है। जैसे, एक तमिल फिल्म को हिंदी में दिखाने के लिए नए कलाकार उसकी आवाज़ डालते हैं। ताकि दर्शक भाषा के बाधा के बिना कहानी का आनंद ले सकें।
इसके अलावा, जब किसी एक्टर की आवाज़ फिल्म के मूड के अनुकूल नहीं लगती या फिर उनकी बोली में सुधार करना ज़रूरी होता है, तो भी डबिंग का स
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