माता-पिता की सेवा: सबसे बड़ा धर्म
हम जीवन में कितने भी तप, पूजा या धार्मिक कार्य कर लें, लेकिन अगर उसमें माता-पिता की सेवा नहीं है, तो सब कुछ व्यर्थ है। शास्त्र कहते हैं – मातृ देवो भव, पितृ देवो भव। यानी माँ और पिता ही सच्चे देवता हैं। उनके बिना कोई भी पूजा अधूरी है।
अगर कोई व्यक्ति पूरे जीवन तपस्या करे, मंदिर-मस्जिद घूमे, नाम जपे, लेकिन अपने माँ-बाप को दुखी रखे, उनका अपमान करे, तो उसके सभी कर्म निष्फल हो जाते हैं। उनकी खुशी के बिना कोई भी आस्था अधूरी है।
माता-पिता के प्रति सम्मान और सेवा न केवल मानवीय कर्तव्य है, बल्कि सबसे बड़ा धर्म भी है। वे भगवान के रूप हैं, जिन्होंने हमें जीवन दिया, पालन-पोषण किया और बिना किसी शर्त के प्यार दिया। उनकी खुशी में ही परमात्मा की प्राप्ति का रहस्य छिपा है।
इसलिए, भले ही आप धार्मिक कार्य करें, लेकिन उससे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके माँ-बाप खुश हों। उनकी आँखों में आनंद हो। क्योंकि जहाँ म
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