डरावनी फिल्में हमें क्यों डराती हैं?

डरावनी फिल्मों का जादू यह है कि वे हमारे अंदर छिपे डर को जगा देती हैं, लेकिन फिर भी हम उन्हें देखना पसंद करते हैं। इसका सबसे बड़ा राज़ है – तनाव। निर्माता और निर्देशक रहस्य, सस्पेंस, रक्तरंजित दृश्य, आतंक और अचानक के डरावने पलों के जरिए एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो दर्शक को कुर्सी के किनारे बैठा देता है।

लेकिन सिर्फ डर दिखाने से काम नहीं चलता। असली असर तब होता है जब फिल्म हमसे जुड़ी लगे। यहीं काम आती है प्रासंगिकता। अगर कहानी, चरित्र या जगह ऐसी हो जिसे देखकर हमें लगे कि यह तो हमारे इर्द-गिर्द भी हो सकता है, तो डर और गहरा हो जाता है। चाहे वह एक अंधेरे घर का बंद कमरा हो या एक अकेली रात की सड़क – जब हम खुद को उस स्थिति में देखने लगें, तो डर असली लगने लगता है।

इसलिए डरावनी फिल्में सिर्फ विचारधारा नहीं, बल्कि हमारे मन की गहराई में छिपे भय को छूने में माहिर होती हैं

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