श्वास: जीवन का पहला और अंतिम कृत्य
जब नवजात शिशु पहली बार रोता है, तो वह अपनी पहली श्वास लेता है। वही श्वास, जो जीवन की शुरुआत का संकेत देती है, वही अंतिम समय में शरीर छोड़ने का संकेत भी होती है। श्वास ही जीवन का सबसे पहला और सबसे अंतिम कृत्य है।
हम इतने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त रहते हैं कि अक्सर यह भूल जाते हैं कि श्वास लेना भी एक चमत्कार है। हर सांस हमें जीवंत रखती है, फिर भी हम उसके प्रति ध्यान नहीं देते।
कई आध्यात्मिक परंपराओं में श्वास पर ध्यान केंद्रित करना जीवन की गहराई महसूस करने का साधन माना जाता है। जब हम गहरी सांस लेते हैं, तो न सिर्फ शरीर शांत होता है, बल्कि मन भी स्थिर होता है। हम उस पल में जीना सीखते हैं — बिना भूतकाल के बोझ या भविष्य की चिंता के।
हर सांस में एक छोटी सी मौत और जन्म छिपा है। सांस लेना और छोड़ना — यह चक्र बिना ठहराव के चलता रहता है, जब तक जीवन टिका रहता है। शायद इसीलिए कहा जाता है कि जब तक स
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