दुनिया अजूबों से भरी पड़ी है और जब हम प्रकृति के
विशेषज्ञों की क्या राय है?
वैज्ञानिकों और खगोलविदों के अनुसार, आसमान में एक साथ पांच सूरज का दिखाई देना कोई अलौकिक या चमत्कारी घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से एक ऑप्टिकल इल्यूजन (प्रकाशिक भ्रम) है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब हवा में तैरते हुए बर्फ के क्रिस्टल पर सूरज की रोशनी एक खास कोण (22 डिग्री) से पड़ती है, तो रोशनी परावर्तित और अपवर्तित (refract) हो जाती है। इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में 'सनडॉग' (Sundog) या 'पैरहेलियन' कहा जाता है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति केवल बेहद ठंडे इलाकों में ही बन सकती है, जहां हवा में नमी जम जाती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह घटना इंसानी आंखों को धोखा देने जैसी है, जहां असली सूरज सिर्फ एक ही होता है, लेकिन प्रकाश के खेल के कारण उसके अगल-बगल नकली सूरज की आकृतियां चमकने लगती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या पांच सूरज दिखने की घटना भारत या अन्य गर्म देशों में भी हो सकती है?
नहीं, इस घटना के लिए वातावरण का अत्यधिक ठंडा होना अनिवार्य है। भारत जैसे उष्णकटिबंधीय (tropical) देशों में सामान्यतः ऐसा तापमान और हवा में बर्फ के क्रिस्टल नहीं पाए जाते हैं। यह दुर्लभ नजारा केवल चीन के उत्तरी हिस्सों, रूस के साइबेरिया, कनाडा या अलास्का जैसे अत्यधिक ठंडे और बर्फीले क्षेत्रों में ही देखा जा सकता है, जहां तापमान शून्य से बहुत नीचे चला जाता है।
2. क्या इन नकली सूरजों से धरती पर गर्मी या रोशनी दोगुनी हो जाती है?
बिल्कुल नहीं। चूंकि ये
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