मौत से पहले के कुछ क्षणों में क्या होता है?
मौत के आखिरी पलों में शरीर धीरे-धीरे बंद होना शुरू हो जाता है। आँखें बार-बार बंद हो सकती हैं या आधी खुली रह सकती हैं। कई बार व्यक्ति का जबड़ा ढीला पड़ जाता है और चेहरे की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं।
त्वचा पीली पड़ना और सांस का अनियमित होना भी आम बात है।आखिरी समय में सांस लेने का तरीका बदल सकता है—कभी जोर से सांस लेते हैं, तो कभी बहुत धीमे से। कुछ लोगों में यह श्वास के चक्र में वैकल्पिक पैटर्न देखा जाता है, जिसमें कुछ देर तेज सांस के बाद अचानक शांति सी छा जाती है।
ये सभी लक्षण शरीर के स्वाभाविक ढंग से बंद होने के हिस्से होते हैं। यह समझना जरूरी है कि यह प्रक्रिया स्वाभाविक होती है और अक्सर दर्द रहित होती है। प्रियजनों का पास बैठना, प्यार से बात करना या चुपचाप हाथ पकड़ लेना मरीज के लिए बहुत सुकून भरा हो सकता है।
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