शिक्षा का अधिकार: दुनिया भर में कानूनी स्वीकृति
2 अप्रैल, 2010 को यूनेस्को ने अपनी एजुकेशन फॉर आल ग्लोबल मॉनिटरिंग रिपोर्ट जारी की, जिसमें एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। लगभग 135 देशों ने अपने संविधान में यह प्रावधान किया है कि हर नागरिक को नि:शुल्क और भेदभाव रहित शिक्षा का अधिकार होना चाहिए।
यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि दुनिया भर में शिक्षा को एक मौलिक अधिकार के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। भारत जैसे देशों ने 2010 में ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू करके 6 से 14 साल के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा को कानूनी दर्जा दिया।
लेकिन संवैधानिक प्रावधान होने के बावजूद कई देशों में इसके वास्तविक अमल में चुनौतियां बनी हुई हैं। गरीबी, लिंग भेद, सामाजिक असमानता और युद्धग्रस्त स्थितियां अभी भी लाखों बच्चों को शिक्षा से वंचित रखती हैं।
फिर भी, 135 देशों का यह आंकड़ा उम्मीद की किरण है। यह साबित करता
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