गुजरात के अंतिम राजपूत राजा: करणदेव वाघेला

करणदेव वाघेला, जिन्हें इतिहास में करण घेलो के नाम से भी जाना जाता है, गुजरात के अंतिम राजपूत शासक थे। वे अन्हिलवाड़ (आधुनिक पाटन) के वाघेला वंश के अंतिम शासक थे, जो 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में गुजरात और सौराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों पर राज करते थे।

करणदेव का शासनकाल एक संक्रमणकाल था, जब दक्षिण से उठने वाली शक्तियां उत्तर की ओर बढ़ रही थीं। उनके समय में दिल्ली सल्तनत के तुर्क सेनापति अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात पर आक्रमण किया। 1299 में अलाउद्दीन खिलजी के सैनिकों ने अन्हिलवाड़ पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद करणदेव का शासन समाप्त हो गया।

इतिहासकारों के अनुसार, करणदेव वीरता और दृढ़ता के प्रतीक थे। खोए हुए राज्य को वापस पाने के लिए उन्होंने कई बार संघर्ष किया, लेकिन अंततः पराजित हुए। उनके शासन के अंत के साथ गुजरात में राजपूत शक्ति का पतन भी हो गया।

करण घेलो की कहानी न केवल एक राज

यह भी देखें

विस्तृत लेख

मुगल साम्राज्य की अदृश्य शक्ति: जलालुद्दीन अकबर की धाय मां माहम अनगा और वह अनकहा इतिहास जिसने हिंदुस्तान को बदल दिया

और पढ़ें →

मुगल साम्राज्य के संस्थापक जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर की संतानें: एक ऐतिहासिक विश्लेषण और अनकही कहानियों का सफर

और पढ़ें →

मुगल सम्राट जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का वैवाहिक जीवन और इतिहास की गहराइयों में दबे कुछ अनसुने सच

और पढ़ें →

जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर की संतानें: महान मुगल सम्राट के उत्तराधिकार और पारिवारिक विस्तार का एक गहन ऐतिहासिक विश्लेषण

और पढ़ें →

मुगल सल्तनत का वह सुनहरा दौर: इतिहास की कसौटी पर सबसे महान सम्राट की असली पहचान

और पढ़ें →

संबंधित विषय