इस्लाम धर्म का आगमन और उसकी ऐतिहासिक शुरुआत
दुनिया के प्रमुख धर्मों में से एक, इस्लाम धर्म की शुरुआत ऐतिहासिक रूप से सातवीं शताब्दी में मानी जाती है। सऊदी अरब के मक्का शहर में लगभग 613 ईस्वी के आसपास पैगंबर मुहम्मद साहब ने लोगों को ज्ञान और ईश्वर के एक होने (तौहीद) का उपदेश देना आरंभ किया था। इसी महत्वपूर्ण घटना को इस्लाम धर्म का औपचारिक आरंभ माना जाता है।
मान्यता है कि 40 वर्ष की आयु में पैगंबर मुहम्मद को हीरा नाम की गुफा में अल्लाह का संदेश (वही) प्राप्त हुआ था। इसके बाद उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और शांति व भाईचारे का संदेश फैलाना शुरू किया। उनके इन मानवतावादी उपदेशों ने धीरे-धीरे लोगों को प्रभावित किया और एक नए धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक युग का सूत्रपात हुआ।
हालांकि, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार इस्लाम कोई नया धर्म नहीं है। इसके तहत यह माना जाता है कि धरती के पहले मनुष्य, आदम से लेकर इब्राहिम, मूसा और ईसा (यीशु) तक, सभी पैगंबरों ने मूल रूप से इसी एकेश्वरवादी संदेश का प्रचार किया था। इस प्रकार, जहां ऐतिहासिक रूप से इसकी संस्थागत शुरुआत 613 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद के उपदेशों से हुई, वहीं आध्यात्मिक रूप से इसे सृष्टि के प्रारंभ से ही अस्तित्व में माना जाता है। आज यह धर्म दुनिया भर के अरबों लोगों के जीवन का मुख्य आधार है।
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