यादव वंश का अंत कैसे हुआ?
यादव या यदुवंश का विनाश एक दुखद लेकिन गहरे संदेश वाली घटना है। भगवान श्रीकृष्ण के समय तक यह वंश बहुत समृद्ध और शक्तिशाली हो चुका था। मगर अहंकार और धीमे-धीमे बढ़ती अनाचार की भावना ने इसके अंत की नींव रख दी।
एक दिन, कुछ युवा यदुवंशी बालकों ने ऋषि दुर्वासा का मजाक उड़ाया। उन्होंने उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जो किसी सच्चे ऋषि के साथ नहीं किया जाना चाहिए था। इस पर क्रोधित होकर दुर्वासा ने यह शाप दिया कि यदुवंश का विनाश हो जाएगा।
शाप के प्रभाव से एक दिन, जब यदुवंशी प्रभास क्षेत्र में विश्राम के लिए इकट्ठे हुए, तो मद्यपान और तर्क-वितर्क के बीच उनके बीच कलह शुरू हो गई। छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा हुआ और क्रोध में आकर उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ हथियार उठा लिए। इस आंतरिक संघर्ष में लगभग सभी यदुवंशी मारे गए।
भगवान श्रीकृष्ण ने इस सबे देखा, लेकिन रोका नहीं। कहा जाता है कि वे जानते थे कि गांधारी का श्राप और दुर
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