शुभ समाचार लाने वालों के पैर कितने सुंदर होते हैं
कभी सोचा है कि पैरों को लेकर इतनी खूबसूरत बात क्यों कही गई है? यशायाह 52:7 में कहा गया है, "पहाड़ों पर उनके पांव क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार सुनाते हैं, जो शांति का सुसमाचार सुनाते हैं, जो उद्धार का सुसमाचार सुनाते हैं..."। यहाँ पैरों की खूबसूरती उनके रूप या आकार में नहीं, बल्कि उस मिशन में है जिसके लिए वे चल रहे हैं।
कल्पना कीजिए—एक व्यक्ति पहाड़ियों को पार कर रहा है, थका हुआ, थके पैरों से, लेकिन उसके होंठों पर एक संदेश है—शांति का, उद्धार का, आशा का। वह संदेश यही है कि "तेरा परमेश्वर राज्य करता है!" ऐसे पैर, चाहे धूल से उबड़-खाबड़ हों, फिर भी दिल को छू जाते हैं।
रोमियों 10:14-15 में पौलुस भी इसी भावना को दोहराते हैं। वह कहते हैं कि विश्वास तभी आएगा जब सुनने को मिले, और सुनाने के लिए कोई तो जाएगा। और जो जाते हैं, वे नहीं जाते अपने लिए, बल्कि प्रेम और सच्चाई के लिए। उनके
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