महाकाली: शक्ति और प्रलय की देवी

महाकाली एक ऐसी देवी हैं जो न केवल भय और प्रलय की देवी हैं, बल्कि सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने वाली अनंत शक्ति का प्रतीक हैं। मान्यता है कि वे माँ दुर्गा के ही एक रौद्र रूप हैं, जो अधर्म और अंधकार के खात्मे के लिए अवतरित हुईं।

महाकाली का जन्म किसी सामान्य घटना से नहीं, बल्कि दैत्यों के अत्याचार से त्रस्त देवताओं की प्रार्थना के बाद हुआ। कहा जाता है कि जब राक्षस रक्तबीज ने समस्त सृष्टि को डराने लगा, तब देवी दुर्गा से महाकाली का उद्भव हुआ। उनका क्रोध इतना भयंकर था कि उनके हरे जीभ ने पूरी धरती पर छा जाने वाले रक्त को पी लिया, ताकि उससे नए राक्षस न उत्पन्न हो सकें।

उनकी छवि भयावह है – खुले केश, लाल जीभ, गले में मुंडमाला और हाथों में खड्ग व त्रिशूल। मगर यह भय वास्तव में अज्ञानता के प्रति है। महाकाली समय के परे हैं – वे काल की भी काल हैं। इसलिए उन्हें महाकाली कहा जाता है।

आज भी उत्तर भारत, विशेषकर बंगाल, बिह

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