श्री कृष्ण की मौत कैसे हुई थी?
श्री कृष्ण के जीवन के अंतिम पलों की कथा गहरे भावनात्मक स्तर की है। जब द्वारका के समय समाप्ति के करीब था और यादव वंश का पतन हो चुका था, तब श्री कृष्ण ने वन की ओर प्रस्थान किया। वह एक वृक्ष के नीचे ध्यान में लीन हो गए।
उसी समय, एक शिकारी जिसका नाम जीरू (कभी-कभी वली या मिरी के नाम से भी जाना जाता है) था, वह शिकार के लिए उस वन में गया। उसने एक मछली पकड़ी, जिसके शरीर में एक धातु का टुकड़ा था। उस टुकड़े को लेकर उसने एक नुकीला तीर बनाया।
जब जीरू शिकार की तलाश में था, तो उसने ध्यान में बैठे कृष्ण को एक हिरण समझ लिया। अंधेरा हो रहा था और आकृति स्पष्ट नहीं थी। उसने तीर चला दिया। तीर श्रीकृष्ण के पैर में लगा, जहाँ उन्हें पहले से ही एक श्राप लगा था कि उनकी मृत्यु एक तीर से होगी।
श्री कृष्ण ने उस घटना को स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस तरह, जीरू के तीर ने न सिर्फ एक आध्यात
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